STORYMIRROR

खुद को पाया है शहर खुद परेशां है ज़िन्दगी वीरान लगती है अपनी रक्षा करनी है डर लगता है खुद से अब वक्त है मिला खुद को मजबूर करो खुद को मजबूत करो

Hindi खुद-ब-खुद ढलने लगती है Poems